Monday, November 13, 2017

आसरा यह रहा

आसरा यह रहा
मिलने वालों का रेला, ऐसा लगा,
आए बैठे, मगर, बात कर ना सका।
दोस्तों ने बुलाया, नहीं जा सका,
सिलसिला उन के शिकवों का ऐसा रहा।
बात सच्ची नहीं, उनने जैसा कहा,
कुछ हमने कहा, कुछ नहीं कह सका।
देखता रह गया, वक्त बढ़ता गया,
दिल में था जो हमारे, नहीं कह सका।
ना अकेला हुआ, ना मुखातिब हुआ,
आँखों आँखों ने बोला, उन्हीं ने सुना।
आएँगे फिर वहां, आसरा यह रहा,
बैठ लेंगे कहीं, जो ये जीवन रहा।
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