Thursday, January 11, 2018

शुभाषितम्

शुभाषितम्
दास कबीरा उल्टी बानी,
दुनिया कितनी भई सयानी ।
देख बुराई, बोल बुराई,
सुनौ बुराई, करौ बुरा ही,
बुरा किए ही दाना पानी,
जय जय बोलौ यही बयानी,
दास कबीरा उल्टी बानी,
दुनिया कितनी भई सयानी ।

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January 12.2018

जब बोलौ तब सूधी बानी, 
माघ लगे पर सतुआ सानी, 
भला  करौ जस औघर ग्यानी, 
अपनै जड़ मा अमृत डारी,  
दास कबीरा उल्टी बानी,
दुनिया कितनी भई सयानी ।
Comments
Fuhar Bali In this materialistic world, don't be football of others opinion.
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Satish Tripathi दो औरते स्वेटर बुन रहीं थी। पहली बोली देख तूं मेरे सास की बुराई पूरी सुनेगी तो मैं तुझे गले का फन्दा बता दूंगी। दूसरी बोली ।तूं अगर मेरे सास की बुराई करेगी तो मैं तेरी एक बांह बुन दूंगी। अब आप ही बताइये बुराई करना कितना फायदेमंद है ।
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Jalaj Kumar Tiwari आज भी खरी खरी कहने के लिये कबीर का ही माध्यम चुन ना पड़ता है .
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Tariq Ali Quraishi Wah, maashere me phailee buraaeon par kya khoobsurat tanz hai
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Narendra Kant Samadhiya
Narendra Kant Samadhiya Sanchi(truth) ke Sach boleji subke man(heart) se utreji.
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DrRajesh Kannojiya सच कहा गुरुवर आपने दुनिया वास्तव में बहुत सयानी हो चली है•••••
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Dinesh Tiwari Wah sir...
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Anand Pandey दुनिया कितनी भई सयानी
पीयै दूध बतावै पानी..

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