Sunday, June 15, 2014

यारी यार


यारी यार


घिरे घने अंधियार में, दीपक जले हज़ार,
गहरे में जब जा गिरें, राह दिखाएं यार।


ऎसी यारी कुछ करें, धक्का देंय गिराय,
उलटी वारी बह चलें, करने लगें प्रहार।


यारी करता है नही, होती है इक बार, 
बनी बावली घूमती, रहे पहेली यार।


चुन यारी चलती चली, रही आर या पार, 
चुनते ही वो कट गई. मिली ना यारी यार।


यारी की उनको मिली, तीखी बस तासीर, 
हमको मीठी सी मिली, जैसी पूनो खीर।


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Saturday, June 7, 2014

न पावैं सार


पढ़ा सुना गुनतै रहैं, समझ पावैं सार,

नियत घड़ी आए तबै, आखर हों साकार।


हम समझैँ हम कर रहे, करता सब करतार,

डाँड़ गहैं हम हाथ में, साधै खेवनहार।

कभी कभी ऐसा घटै, अकल पावै पार, 

सब कुछ लागै तयशुदा, मानै बारमबार।


आए ना आए

आए ना आए, ज़िक्र तेरा आ ही जाए, 
जिस तरफ जाएं, उसी रस्ते पे आए।   

आए वो आए, हर कदम साए सा आए, 
सपने में आए, जागते लम्हों में आए।  

आए वो आए, इस तरह हौले से आए, 
फाख्ता उड़ते हुए, छज्जे पे आए।  

आए वो आए, आस का दीपक जलाए,
आए वो आए, फिर वही दीदार पाएं।  

आए वो आए, फिर वही कूचा दिखाए,
आए वो आए, याद वो कैसा सताए।  

आए ना आए, अक्स तेरा आ ही जाए,
जाए न जाए, नक्श वो आ कर ना जाए ।  

आए वो आए, किस कदर रह रह के आए, 
आए वो आए, आए वो लब से न जाए ।   

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Monday, June 2, 2014

चल कर देखें

चल कर देखें



वक्त ने एक मौक़ा दिया है 'भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग' के साथियों के साथ विभाग को सौंपी गयी ज़िम्मेदारियों को निभाने का, पूरी कोशिश रहेगी पूरा करने की।

नए दौर में नई उम्मीदें, नए सपने, लाज़िमी हैं। इन्हे असल ज़मीन पर आंकना और लाना सब की ईमानदार कशिश पर टिकता है। इस काम में साझीदारी ज़रूरी है सरकारी और गैर सरकारी सभी सरोकारों की।  

एक लय में तय न होगा, ये मुकामी फैसला,
कुछ कदम हम भी चले, इतना रहेगा हौंसला।

छोटे-छोटे कदम रखते बढ़ते जाने का काम हमारा है, ठिकाना कब मिलेगा बिना यह सोचे। चलिए चल कर देखें।

बुज़ुर्ग कहते हैं - चलने वालों को निगाह मिल ही जाती है।