Tuesday, July 22, 2014

एक दिन सजै मसाना है


एक दिन सजै  मसाना है

ना कोई बाम्हन ना कोई ठाकुर, ना बनिया ना लाला है,
स्वारथ बस बस एक गुट बैठें, यहै जगत की माया है।  

ना कोई रिश्ता ना कोई नाता, ना बबुआ बबुआना है,
राह कटे पर कूकुर बन अस, झपटै हलक निवाला है।    


ना कोई देवता ना कोई देवी, ना काशी ना करवट है, 
कैसेउ लछमी जगैं पलन में, एक्कै चाहत आला है।  

ना कोई ओझा, ना कोई सोखा, ना जोगी ना घोरी है, 
ना कोई दानी, ना कोई ग्यानी, ऐसै गड़बड़झाला है।   


ना कोई तापस, ना बलवाना, ना कोई सजग सुजाना है,
गावै केतनौ भजन कबीरी, रग रग रंग रस भीना है।    



ना कोई राजा, ना कोई रानी, ना परजा, ना चाकर है,
ना कोई प्रहरी, ना कोई पिंजरा, बखत परै उड़ जाना है।

ना कोई सुलझा, ना कोई उरझा, उरझत सुरझत जाना है, 
केतनौ जोड़ौ, केतनौ सिरजौ, एक दिन सजै  मसाना है। 

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