होनी न फेर पाएगा
Sunday, August 30, 2026
Saturday, August 29, 2026
'बेमशरफ़ की बातें'
'मुझको अपने हाल का हवाल दीजिए !'#
कभी-कभी तो मेरा भी ख़याल कीजिए !!
माना दुनिया भर में जंजाल बहुत है,
कभी-कभी उनसे कुछ निजात लीजिए !!
काम के बवालों का दबाव बहुत है,
उनको भी किनारे कुछ सरकाय दीजिए।!
घिरते सवालों का सिरदर्द बहुत है,
थोड़ा सा बतियाने का भी याद रखिए !!
अपनी लय में आपका अंदाज अपना है,
औरों का भी थोड़ा-मोड़ा ध्यान रखिए !!
मनमानी राहों पर चलना तो सही है,
भूली भटकी राहों का भी हाल लीजिए !!
मस्त-मगन रहिए ये अपने मन की चाहत है,
अरझी-उलझी अलकें तो संवार लीजिए !!
सुख-दुःख की खबरें देना तो केवल दस्तूरी है,
कभी कभी बेमशरफ़ वाली बातें कीजिए !!
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# धुन मंज़र भोपाली से नक़ल कर ली है
Sunday, August 16, 2026
Wednesday, July 29, 2026
अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !
क्या बीती है मुझ पर, तुम्हें क्या पता !!
होठों की तड़पन, तो तुमने थी देखी,
मगर क्यों हुआ ऐसा, तुमने न सोची !!
कैसी विकलता वो पीड़ा थी कैसी !
थोड़ी भी उसकी तू तह में न पैठी !!
कहा तो कहा, क्या बीती है मुझ पर
तुम्हें क्या पता है, तुम्हे क्या पता है !!
तुमने कहा था, रास्ते और भी हैं,
जो चाहे वो कर लो, ये मैंने कहा है।
न जाने क्या सोचा, मायने क्या लगाए !
फिर न पलटे बताए असल बात क्या है
अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !!
क्या बीती है मुझ पर, तुम्हे क्या पता।
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Friday, July 24, 2026
नातों के सब सूत्र समझते पूरा जीवन लग जावे,
फिर भी जाने कुछ कितना अनजाना ही रह जावे।
कुछ नाते मतलब के होते पल भर में चुक जाने वाले,
कोई मतलब आ जाए तो फिर से जग जाने वाले।
कुछ नाते त्योहारी होते कभी कभी मिलने वाले,
सुख दुःख कोई आ जाए ब्यौहारी में आने वाले।
खैर खैरियत कभी को पूछें कभी कभी मिलने वाले,
बिरले ही मिलते-बतियाते बेमशरफ़ नेह लगाने वाले।
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Wednesday, July 22, 2026
पुनि बैतलवा डाल पे बैठे ---।
एक ज़माना हमने देखा,
अपनी आँखों हमने देखा
फिर फिर देखा,
देख रहे हैं, देखेंगे।
हिंदी लेकर आएंगे,
अंग्रेज़ी दूर भगाएंगे।
दोनों हाथ उठा कर बोल,
गरीबी दूर हटाएंगे।
समाजवाद ले आएँगे,
सम्पूर्ण क्रान्ति अब लाएंगे।
सिंहासन खाली करो
कि अब तो जनता वाले बैठेंगे।
मंडल-मंडल गाएंगे,
समता लेकर आएँगे।
बाबा-बाबा नाम जपेंगे,
भेदभाव सब दूर करेंगे।
तिलक-कमण्डल
लेकर निकले,
भ्रष्टाचार मिटाएंगे,
रामराज ले आएंगे।
वही कहानी सुनते लखते,
माथा अपना धुनते धुनते,
चंदामामा में जो पढ़ते,
पुनि बैतलवा डाल पे बैठे ---।
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Sunday, July 19, 2026
19 July 2014
कल शाम बड़े काम की बात कह गए एक बनारसी।
उनके जिगरी दोस्त (जो अब नहीं रहे) ज़ोर दे के कहते रहे -
"बाबू !
भगवान से कब्बौ न्याय ना मँगिहा,
ना जाने जाने-अनजाने कौन कौन पाप कइले होइहा।
उप्पर वाले से जब माँगा तो रहम मँगिहा, बस। और, कुच्छौ नाहीं !"
एतना गहरा उतरा रहा, रहा ना रहा, ई बतिया त जुग-जुग जियत रही, गुरू !!
Sunday, July 12, 2026
Friday, July 3, 2026
Sunday, June 28, 2026
Friday, June 26, 2026
Thursday, June 25, 2026
Monday, June 22, 2026
Friday, June 19, 2026
'ढंग से समझिए !!'
किसी से मिलने की चाह मत रखिए,
किसी से मन की बात ना कहिए!
सबके अपने ही लस्तगे हैं ज़माने में,
किसी के दर पे अब कहाँ थमिए !
अब कौन चलेगा रास्ते पर तेरे,
किसके मशरफ के अब कहाँ कहिए !
सबकी अपनी जुदा जुदा हैं तरज़ीहें,
ख्वाहिशें नज़रे इनायत की मत रखिए !!
बेहतर है तन्हाई में सिमट कर रहिए,
बेवजह किसी को तंग ना करिए !!
हवाओं के रुख की भी खबर रखिए,
अपनी सीमाओं को ढंग से समझिए !!
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Tuesday, June 16, 2026
Monday, June 15, 2026
Wednesday, January 21, 2026
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