Tuesday, May 28, 2013

हममें ये दम कहाँ ?


हममें ये दम कहाँ ? 


१. 
दस्ता हमारे साथ मिल, चलता रहा, चलता रहा,
मिलके किया सबने हवन, हमको सुफल मिलता रहा। 

२. 
छोटा सा है, लेकिन यही, अपना बड़ा मंदर हुआ,
करता इसी की बंदगी, दिल से यहाँ सर है झुका।  

३. 
दोस्ती का क्या कहें, दिल खोल कर मिलता रहा,
खाता-बही रखा नहीं, किसने कहाँ, क्या दे दिया।   

४. 
अपना नही, कुछ भी यहाँ, सब आप का दिया, 
समिधा जुटाने में जुटा, यूं ही कलावा बंध गया। 
  
५.  
तपता हुआ गोला उठा, झकझोरता चला गया,  
अमराइयों की छाँव में, अपना वहाँ झूला पडा। 

६. 
किस धरा पे सो रहा, मधु रस चखा किया,
झरनों से, कंदराओं से, मिलती रही दुआ।  

७. 
किस गाछ तर शीतल हवा, नदियों का जल छका, 
एहसान हम पे जो किया, होगा यहाँ कहाँ अदा।  

८ 
यह तो बताओ क्या खता, देते क्यों बद दुआ,
आपकी बगिया में, वो प्यारा सा गुल खिला। 

९
आप ही ने तो हमें, दम साध कर गढ़ा, 
ले कर सहारा, आपका, दिन रात चल सका।  

१०
कितना भी अब जतन करें, होंगे नहीं जुदा,
हम तो गले लगाएंगे, सब को बना सखा। 

११   
समझा मुझे कुछ काम का, सबका है शुक्रिया,
छप्पर चढ़ाया आपने, हममें ये दम कहाँ ? 

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Friday, May 24, 2013

ज़िन्दगी का दायरा




 ज़िन्दगी का दायरा 



पौ खुली प्राची में पर वो ही नज़ारा दिख रहा,

बांह में खंज़र छुपाए, खुदकुशी पे वो अड़ा। 



कैसे भला आए समझ, आँखें हैं पर अंधा हुआ
,
अपना चमन ही सींचता, तेज़ाब से, पागल हुआ।  



छोड़ो चलो आगे चलें, शायद फ़साना हो जुदा,

कब तलक जोहा करें, होने लगी ऊबन यहाँ। 



क्या करें सबको पता कैसे ज़माना जल रहा,

पास में दरया भरा, वो भी मगर उबल रहा। 


खूंटों में बंध के कब रहा ये ज़िन्दगी का दायरा,

कितने बगूले उड़ गए, किसका रहेगा आसरा। 



दौर ये फितरत का है, मिलता नहीं इसमें मज़ा 

रस्म जो पल्ले पड़ी, कब तक निभाए जाएगा। 

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Monday, May 13, 2013

ठहरा है कारवां



ठहरा है कारवां


आओ ज़रा, थम लें यहाँ, कैसी बहे हवा, 
आया नया, मुकाम अब, ठहरा है कारवां। 

सूखा हुआ, मरू सामने, चश्मा मिला नया, 
कीकड़ का घेर ही सही, नम है यहाँ धरा।  

ढल चली है सांझ पर वितान सज गया,
खामोश आके गुफ्तुगू की बात कह गया।  

मंजिल अभी तो दूर, इक पड़ाव मिल गया,
काली सियाही रात में, अलाव जल गया। 

तारों का जाल सज गया, धुंधला सा आसमाँ,
सपनों की खेप चल पड़ी, होगा सुबह को क्या ?   

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Thursday, April 25, 2013

हवाल सब सुनाएंगे, क्या क्या हुआ किया


हवाल सब सुनाएंगे, क्या क्या हुआ किया  
२६ मार्च - २४ अप्रैल२०१३ 

1. 
बेड़ा चला था मौज में, दरयाव बढ़ गया,
अपनी कहानी ने नया, पन्ना पलट लिया।

2. 
डांड़ा हमारे हाथ से, सहसा छटक गया,
बेड़ा भटक के, आप के, रेते पे आ गया।     

3. 
बस में नहीं अपने रहा, लहरों ने ये किया, 
यूं ही करीब आप के, लमहों ने ला दिया।
  
4.   
बेकार बाज़ू हो गए, भंवरों ने ये किया,
ऐसा किया, ये जिस्म-ओ-जां, जख्मों से भर गया।  

5. 
अपना नहीं कुसूर कुछ, टसकन ने ये किया,
संदल की आस ने हमें, ये दर दिखा दिया। 

6. 
मिल कर जुदा होते गए, राहों ने ये किया, 
राग-ओ-कसक थमा दिया, आगे चला गया। 

7. 
हम तो महज चलते रहे, किस्मत ने तय किया, 
जिस ओर की चली हवा, उस ओर उड़ लिया। 

8. 
हमने न कुछ भला किया, न कुछ बुरा किया,
मंज़ूर-ए-दौर जो हुआ, उतना ही कर लिया । 

9.  
अपने ललाट  पे लिखा, वो पुन्य पा लिया,
पाप भी किया, मगर, दस्तूर भर किया। 

10. 
गीली जमीन पर अभी, कुछ ही कदम बने, 
उस ठौर पर, बालू चरो ने, घर बना लिया। 

11. 
दो-चार पल ही क्या मिले, सुध ही भुला गया,
इक कहानी, अनकही, सुन कर, सुला गया। 

12. 
हम तो संभल के होश में, आए, ये क्या किया, 
अपने मुकाम का पता,  तुमने बदल दिया।  

13. 
ना राज़ कुछ रहा, न राज़-ए-दार ही रहा,
बस्ती यही रही, मगर गुमनाम हो गया। 

14.
दावा नहीं रहा, न दावेदार ही रहा,
 तहरीर क्या लिखाएं, वो काजी चला गया। 

15. 
ना दूर हो सका, न बगलगीर ही हुआ,
अपने अकेले द्वीप का, संगीत हो गया। 

16
वक्त ने हमको यहाँ, क्या क्या दिखा दिया,
अपने अजाने अक्स का, दीदार पा लिया। 

17.
वक्त-ए-दौर वो भी था, हमको मिला गया,
इस सफ़र में आप का, रहबर बना दिया।  

18.  
बदला है वक्त-ए-दौर फिर, खेमा उखड़ गया, 
डेरा, पडेगा, अब कहाँ?  लो फिर भटक गया। 

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Tuesday, March 26, 2013

तोहरै सहाय


१ 
यै 'फागुन', ए 'बाबा'! तोहरै सहाय। 
उज्जर चदरिया, रंगाईल बनाय, 
यै 'फागुन', ए 'बाबा'! तोहरै सहाय। 

२. 
कैसन बयरिया बा, हरिना कुदाय,
तपसिया में रहली, आसन डोलाय।

३. 
निमिया कै पाती, गइल पियराय,  
हियरा ह हल्लुक, पवन पत्ताय।  

पत्ताय = हवा में पत्ते की तरह लहराना 

४. 
कांची कोपलिया, सगरो सजाय,
मुवलौ लतरिया, मूड़ी उठाय। 

कांची = कच्ची, कोपलिया = कोपल, सगरो = सब जगह, मुवलो = मरा हुआ, लतरिया = लतर, मूडी = सिर  

५. 
टहकै ल सेमल, लाली लहाय,
चिरई स चिहुंकै, जियरा बहाय।   

टहकै = चटक 

६. 
मह मह ह मोजरा, महुआ चुआय,   
बोरसी क रखियौ, बहुर सुलगाय।   

बोरसी = बुझी हुई आग राख से दबा कर रखने वाला पात्र 

७. 
कैसन पियसिया, पियले गढाय,
केतनौ छकावै, न रचिकौ अघाय।  

पियसिया = प्यास, पियले = पीने पर, रचिकौ = तनिक भी, अघाय = मन भरना 

८. 
आवैं पहुनवा, झूरै ना जांय,
रंगल गुलाबी, हरियर सुहांय। 

पहुनवा = मेहमान/ दामाद, झूरै = सूखे 

९. 
बीड़ा रंगीला, मीठा चभाय, 
पल्लू उमेठे, गारी गवाय।  

१०. 
जोगिया ब बाना, जटा गोलियाय,
भसम तन रचाये, फिरहू रसाय। 

गोलियाय = साधुओं की गोल ऊंची जटा, रसाय = रसयुक्त होना 

११. 
मसाने रमावैं, निरल्ले सधाय,
फगुवा बरावैं, ऊ माथे ठठाय। 

मसाने = श्मशान, निरल्ले = एकांत, बरावें = बचाना, ठठाय = ठहाका मार कर हंसना  

१२  
मनवा न ठहरै, तड़कै अगार, 
बछरू ल लहकै, पगहा तोड़ाय। 

तड़कै = उछल कर उस पार जाना, अगार = आवास, बछरू = बछड़ा, पगहा = रस्सी, तोड़ाय = तोड़ कर छूटना 

१३
अंगरवा स दहकै, टेसुआ फुलाय,
मुड़ेरवा से मारैं, धनुही तनाय। 

अंगरवा = अंगार, दहकै = लाल शोले की तरह जलना, टेसुआ = टेसू/पलाश , फुलाय = फूलना, मुड़ेरवा = मुडेर, धनुही = छोटा धनुष (आँख की धनुही जैसी उठी भौंह)

१४. 
फुद्कै फुलसुन्घिया, बुलबुल अनार,
कुंजन मा चहकै, अंखिया नचाय। 

फुलसुन्घिया = फूल सूंघने वाली नन्ही चिड़िया

१५. 
रत रात रानी गमकै, बगिया महाय,
पकरिया कै कल्ला, नियारे सजाय। 

रत = रमना, रत-रानी = रातरानी का पौधा, महाय = महकना, पकरिया = पाकड़ का पेड़, कल्ला = नयी उगी पत्तियाँ, नियारे = न्यारे 

१६. 
चन्दा ह चटकल, छिटकै उजार,
रजनी नहावल ह, पियरी छहाय। 

१७. 
नयके न मानैं, नसेनी लगांय,
सूधे पुरनियन पै, किरची चलांय। 

नयके = युवा, नसेनी = सीढी; किरची = कांच का नोकीला टुकडा

१८. 
लरिके महल्ले के, लक्कड़ जुटांय,   
टोले मा होरी, मलंग मस्ताय। . 

१९. 
होरियार गावैं, घर-घर दुवार,
विजयसाल ठनकै, फगुआ फुहाय।  

विजयसाल = शाल की लकड़ी का ढोल जैसा वाद्य, फुहाय = रुई के फाहे जैसा 

२०. 
सरोपा भिझोवें, रहिया छेंकाय,
चारिह्यून मुहानी, गगरिया फोराय। 
सरोपा = सिर से पैर तक, भिझोवें = भिगाना, रहिया = रास्ता, छेंकाय = रोक कर, चारिह्यून मुहानी = चौराहे के चारों रास्तों के प्रारम्भ, गगरिया = गगरी/घडा, फोराय = फोड़ना 

२१.   
भीजल कमरिया, घमवा सुखाय,
जुड़ाइल ह भित्तर, रहि रहि ठराय।

भीजल = भीगी हुई, कमरिया = कम्बल, घमवा = धूप, जुडाइल = ठंढ लगना

२२.  
रंगाइल ह मेहंदी स, चटकय चढ़ाय,  
रचि-रचि रचाइल ह, पोरवा पिराय,    
यै 'फागुन', ए 'बाबा'! तोहरै सहाय। 

पोरवा = पोर/ जोड़ 

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Sunday, March 3, 2013

'हियरा हेरान'


  
१. 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 
कोनवा में कवने हौ, दुनिया लुकान, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

२. 
भर रात हेरली, होखल अंजोर, 
अंखिया अमायल*, अंतर अमान,  
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 
* निर्लिप्त 

३.   
अंगना में हेरली, अटरिया अगोर,  
कुंइआ पे हेरली, सगरवा हलोर,    
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

४.  
नगरिया में हेरली, बजरिया खोजान,
बगिया में हेरली, बनवा मंझार, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान।      

५.  
मितवन में हेरली, अरिऔ बहोर,
पोथिया में हेरली, पतिया खखोर, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान।    
  
६. 
कंचन  में हेरली, गहना गढाय,
रजवा में हेरली, जोगवौ लगाय, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

  ७. 
भगती में हेरली, आरति उतार,   
तीरथ में हेरली, मंदर चढाय,  
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

८. 
मंदिर में हेरली, मसनवौ सधाय,
बहु राह हेरली, रहियै हेरान,  
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

९.
केहू हेर पाई, हमनियौ बताई, 
फगुवा गवाई, गुललववौ उडाय, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

कोनवा में कवने हौ, दुनिया लुकान, 
अरे रामा ! हमरा हौ, हियरा हेरान। 

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Thursday, February 28, 2013

उड़ जा पट्टू डैना तान



भिनसारे में भोग लगाय, घर कोने में अगर जलाय,
भगत भाव अंतरा उठाय, भज मन पटटू सीता-राम, 
सीताराम जय सीताराम, भज मन पटटू सीता-राम। 

नरिया फूटी सड़क खोदान, सीवर बहैं चलें उफनान,
कागद कोरे खबर सुजान, लूट मची लूटौ मनमान,
लछमी माता को परनाम, भज मन पटटू सीता-राम। 

काम नहीं कछु दफ्तर जाय, पहुँच जाय तो चुहल उड़ाय,
काम किया तो नश्तर मार, कहाँ कटी ना जेब देखाय, 
ऐस जिऐं सब बरखुरदार, भज मन पटटू सीता-राम। 

समतामूलक देश हमार, हिलमिल करते सब रोजगार,
रजधानी हो या परधान, सब की माया अपरम्पार,
लोकतंत्र की जय-जयकार, भज मन पटटू सीता-राम। 

पढ़ा लिखी होइगै व्यापार, अल्पकाल विद्या सब आन, 
बात करै जो अब आचार, धकियावा जावै सब व्वार,
आज सबै को यहु स्वीकार, भज मन पटटू सीता-राम। 

सबजन सब समाज सबवाद, सबकै एकै सधा निशान, 
राम-रहीम भए एकसार, चौदह पर अब तनै कमान, 
कैसे हू हो बेड़ा पार, भज मन पटटू सीता-राम। 

आना, दो आना, ना यार, पनरह आना बहे बयार, 
डांणी मारौ या तलवार, सबका चला करै व्यवहार,
संविधान कर अंगीकार, भज मन पटटू सीता-राम। 

हरिणाकश्यप बजै हज़ार, होरी में बरिगे प्रहलाद,
घर बारौ जो अपनौ आय, खेलौ रंग लूट बाज़ार,
रघुपति राघव राजाराम, भज मन पटटू सीता-राम। 

फगुआ चारहुं ओर उडाय, मौसम यहै बरोबर आय,
दांव लगाओ अब अर्राय, रुपियन कै अम्बार लगाय,
लै के वीर दाऊ कै नाम, भज मन पटटू सीता-राम। 

फगुआ समदर्शी यहु आन, सबके माथ धरे बहकान, 
अंधियारा हो या उजियार, फगुआ खेलौ भर अरमान,
तोड़उ पिंजरा खुला बिहान, उड़ जा पट्टू डैना तान. 

भज मन पटटू सीता-राम, --------- 

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