Wednesday, July 29, 2026

 अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !

क्या बीती है मुझ पर, तुम्हें क्या पता !!

होठों की तड़पन, तो तुमने थी देखी,
मगर क्यों हुआ ऐसा, तुमने न सोची !! 

कैसी विकलता वो पीड़ा थी कैसी !
थोड़ी भी उसकी तू तह में न पैठी !!

कहा तो कहा, क्या बीती है मुझ पर 
तुम्हें क्या पता है, तुम्हे क्या पता है !!

तुमने कहा था, रास्ते और भी हैं, 
जो चाहे वो कर लो, ये मैंने कहा है।  

न जाने क्या सोचा, मायने क्या लगाए !
फिर न पलटे बताए असल बात क्या है 

अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !!
क्या बीती है मुझ पर, तुम्हे क्या पता।

--------

No comments:

Post a Comment