Monday, February 5, 2018

अब द्याखौ का होय'

Published by Rakesh TewariJanuary 31 at 7:38pm
अब द्याखौ का होय'
गरहन लागा चंद्र पर,
द्याखै जुटि गे लोग।
कोऊ ब्वालै 'सुपर' यहु, 
कोऊ कहै 'ब्ल्यू मून'।
नील-पियर रक्ताभ यहु,
मन पर डारै डोर।
जम्बू द्वीप डोलाय यहु,
सागर तट का होय !!
कहैं घरैतिन घर रहौ,
अश्लेष नछत्तर तोर।
तुम्हरै राशी पर लगा,
कर्क-राशि पै जोर।
मंगल पर टेढ़ी नज़र,
राहु धरैं दोउ गोड़।
चाउर तिलवा दान कर,
तुलसी-दल तर भेय।
गाढ़े माँ जियरा फंसा,
रहि रहि रहा डेराय।
बाघै निपटै शीत यहु,
माघ महीना आय ।
डेढ़ सैकड़ा बाद यहु,
पुनि आवा है जोग।
चैनल चैनल रोर यहु,
अब द्याखौ का होय।
भीतर ते हलकान जिव,
बाहर ते तनियाय -
'अनहोनी होनी नहीं,
'होनी होय सो होय।'
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