Wednesday, August 21, 2013

अंतिम धार

अंतिम धार 

१. 
ये भी कैसी यारी अपनी, जीवन भर की पारी है,
दाँव चला है उनने ऐसा, अपनी भी मजबूरी है.

२ 
चिकने चेहरे भरी लुनाई, कैसी की ऐय्यारी है,
सबके भेद खुले है यारों, उनकी भी तैय्यारी है. 

३ 
गिरते पड़ते, चलते रहते, मंजिल यहाँ ख़ुदाई है, 
झोली खाली, दिल की, अपनी पूरी खुली लटाई है.   

४ 
जिस कीमत पर दांव लगा है, उसकी ना मंजूरी है, 
इसी जनम में धरम बदल लें, ये तो ना दस्तूरी है. 

५ 
गली-अली घर ऊंचे मंदर, आतिश जले उधारी है. 
चमक दमक के आगे दिखती यह कारी अंधियारी है,

६ 
जिनका जीवन कई कलप का, उनकी ये बीमारी है,
अपना ज़्यादा बीत चुका, अब थोड़ी सी मेहमानी है.

७
नेह लगा कर सुनो हमारी अंतिम धार कहानी है,
कहा सुना अब माफ़ करो जो हमने की नादानी है. 

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