Saturday, November 29, 2025

ये एहसास भी कितना तसल्ली-बख्श होता है,

हमारे शहर से बहकर तेरा बेड़ा गुज़रता है।  

27 Nov 2025

Sunday, November 23, 2025

 गुन रहे : 1973-2025

जितना दिखता बाहर,
उससे ज्यादा भीतर,
घमेरे मनोवेग से,
कौन कौन से !!
कब, कहां, कैसे !!
सघन हिमवत,
अवरुद्ध,
अचानक द्रवित स्रवित !!
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14.11.2025

Saturday, November 1, 2025

 'बिधना गढ़ाए !!!'


तीन से तेरह से
तीस दिन, तीन महीने,
तीन सौ दिन के तीन फेरे,
बस बातें और बातें !!

पाहन घिस जाए,
धार भोथराए, 
जाने कस, 
बिधना गढ़ाए !!!

का करे !!
बसिया बसियौटा 
कहां ले सरियाएं
जाएं बरैं, बहाँय ।

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