Wednesday, January 21, 2026

 चलते हैं, 

चलना ही है ।


न नेह जगाओ,
न मोह लगाओ,
न साथ गहो !


अब बहुत हुआ, 
अब बहुत हुआ !


अब चलना है, 
चलना ही है।


16.01.26

Wednesday, January 7, 2026

 रस्मी तौर पर मिलना कोई जरूरी तो नहीं ! 

रोज़ ही तो बेदखली से मिलते हैं ख्यालों में !!

Friday, December 19, 2025

 सुबह सुबह सोचते रहे, 

जल्दी जल्दी लिखेंगे,  
जो कुछ अधूरा 
पूरा करेंगे। 
वक्त बहुत कम है
बहुत कुछ पूरा करना है ।

 फिर हुए उनींदे उनींदे,
अलस अशक्त 
पलकें बन्द 
इतनी जल्दी ही 
गहरी नींद में पलट गईं, 
बहुत बहुत अधूरा है अभी।

Saturday, November 29, 2025

ये एहसास भी कितना तसल्ली-बख्श होता है,

हमारे शहर से बहकर तेरा बेड़ा गुज़रता है।  

27 Nov 2025

Sunday, November 23, 2025

 गुन रहे : 1973-2025

जितना दिखता बाहर,
उससे ज्यादा भीतर,
घमेरे मनोवेग से,
कौन कौन से !!
कब, कहां, कैसे !!
सघन हिमवत,
अवरुद्ध,
अचानक द्रवित स्रवित !!
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14.11.2025

Saturday, November 1, 2025

 'बिधना गढ़ाए !!!'


तीन से तेरह से
तीस दिन, तीन महीने,
तीन सौ दिन के तीन फेरे,
बस बातें और बातें !!

पाहन घिस जाए,
धार भोथराए, 
जाने कस, 
बिधना गढ़ाए !!!

का करे !!
बसिया बसियौटा 
कहां ले सरियाएं
जाएं बरैं, बहाँय ।

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Thursday, October 9, 2025

'बहते बेड़े पर --'

 'बहते बेड़े पर --'


अंदाज़े बयां, 
बहुतै बिजी, 
अभी बात करते, 
अभी मीटिंग में, 
बिसर गया, 
कल बताते,
कल बात करते,
दोपहर में, 
शाम में पक्का
 बात करते ! 

अभी बाहर, 
अभी अपने देस, 
अभी बीमार,
बात हो भी तो, 
बरजते बताते,
कुछ बता कर,
बकिया कल !

कल आता,
बमुश्किल कभी, 
बताते ईमानदार कोशिश, 
विचार कर रहे,
बस लगे हैं,
बस हुआ ही,
जल्द भेजते, 
बस होता होता, 
बहुत दिन आए गए। 
 
बिसर गए का !!
अरे नहीं,
सब याद है, 
बस हो जाए तो बताएं,
धीमा-तेज हुआ,
बताते हैं, 
बस अब होगा,
कचहरी की तारीख़ जैसी
तारीख़ दर तारीख़, 
हनुमान जी की पूँछ जैसी 
बात हो गई। 

बहुतै बकवास, 
बरसाती बखान,
बुड़बक बनाते,
बड़का वाले
बयान बीर 
क्या खूब !!
बहते बेड़े पर सवार !!!

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