Monday, April 3, 2017

चलती है ज़िन्दगी


चलती है ज़िन्दगी 

अब क्या मिले हो यार, 
डगर ही सिमट रही।  

क्या गुफ़्तुगू करेंगे अब,
अलाव बुझ चली।  

हैं काफिले अब भी, मगर, 
वो बानगी नहीं।  

उड़ने को उड़ रहे, मगर, 
डैनों में ख़म नहीं।

ता-ज़िन्दगी ढूंढा, मगर  
वो नज़र आया नहीं।  

क्या करोगे जान कर, 
उनका पता नहीं।

हो तुम बहुत प्यारे, मगर
वो हमसफ़र नहीं। 

क्या सुनाएं दिल-लगी,
अब तो चला-चली।  

फिर भी चलो, जिस मोड़ तक,
चलती है ज़िन्दगी।  

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Thursday, March 30, 2017

जोगीरा सारा रा रा

जोगीरा सारा रा रा 

जोगीरा सारा रा रा ------------ बूझो कौन
होरियारे धावन लगे, बाजन लागे चंग,
 फाग उड़ाते डोलते, उड़ै केसरिया रंग।
सोचत ते आराम से, पहुंड़ रहेंगे घर,
लेकिन आलस टूटि गा, चढ़ा गुलाबी रंग।
तन मन बौरावन लगे, फरकन लागे अंग,
पग अपनौ बहकन लगे, चढ़ गयी थोरी भंग।
चुहल भरी होरी मिली, हरिनाकश्यप संग,
आपौ थोरा भीज कर, छको फाग के तंज।
जोगीरा सारा रा रा, जोगीरा सारा रा रा -----
सारा रा रा -----सारा रा रा -----सारा रा रा -----
१.
आज बिरज में होरी मेरे रसिया,
आज बिरज में होरी बृजबसिया।
 नब्बे पार शतक का चस्का,
रस भीने ज्यों छलका ढरका।
 पदम् राग सोहै माथे पर,
रंग गुलाल शोभै गाले पर।
 छूटत नाहीं रंग ये गहरा,
बाबा फिर फिर बन गए रसिया।
 राधे राधे गुनती दुनिया !!!!!
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)
२.
काशी में केशव मिले
फागुन में बौराय,
अल्ल बल्ल बकने लगे,
अस्सी में पतियाय।
 उज्जर केश केशनि किए
केशव समझ न पांय,
बानर बालक एक से
बाबा कहि कहि जांय।
ऐसी वय तुम्हरी भयी,
प्रभु ही करैं सहाय।
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)
३.
हरिद्रोही हद्दई करैं
पकै उद्द की दाल।
 लखनउआ बानी धरैं,
बनी सजीली चाल।
 उमर भई बन में ह्लैं
चुस्की लें मुस्काय।
सबै कहीं विचरा करैं
नारद मुनि की नाय।
बड़े बड़े बूड़ा किये,
माया समझ न आय।
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)
४.
रश्मिरथी के रंग में,
रंगी गैंती देख,
नए नए रंग में रंगी,
परत उतरती देख।
 देख रंगीली पॉटरी,
उठती नयी उमंग,
साठ पार पाठा भए,
मोछा भरे तरंग।
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)
५.
दाढ़ी में रंग बहुत हैं,
जित देखौ तित रंग,
चित चंचल मानत नहीं,
चितवन चरिहुँ लंग।
सबकी होरी बर रही
बरस बरस के रोज़,
वै लूका थामे फिरैं,
गली गली में तंग।
 होरियारे मानें नहीं,
घेर लिए लै रंग,
होरी में उनकौ किए,
चारों खाने चित्त।
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)
६.
लागी ऐसी लग गयी,
एकहि एक लकीर,
गंगा तीरे बस गयी,
उनकी सब तदबीर।
जाय द्वारिका बस रही,
गोकुल की तसवीर।
 ब्रज की छूटी अस बसी
गोपिन भईं अधीर।
 उद्धव गति लेकर फिरैं,
अगिया वारे बीर।
(जोगीरा सारा रा रा --- , जोगीरा सारा रा रा --- बूझो कौन)

क्या करें

क्या करें
१.
अपना-पराया ना दिखे, वो क्या करें,
हैं इस कदर बहके हुए,वो क्या करें।
२.
दहलीज़ पर काई बहुत, वो क्या करें,
राह है फिसलन भरी, वो क्या करें
३.
है समन्दर सामने, वो क्या करें,
आ कर किनारे डूबते, वो क्या करें।
४.
उनको पुकारा तो बहुत, वो क्या करें,
लहरों में हैं सुनते नहीं, वो क्या करें।
५.
होश खोया जोश फिर, वो क्या करें,
अच्छा-बुरा समझें नहीं, वो क्या करें।
६.
आग तो है आग फिर, वो क्या करें,
तापते हैं 'और' फिर, वो क्या करें।
७.
हैं सयाने ही सभी, वो क्या करें,
तीर टिप्पस साधते, वो क्या करें।
८.
दिल की दिल ही में रहे, वो क्या करें,
लोग सम्मोहन में हैं, वो क्या करें।
९.
लौ पर पतंगे डोलते, वो क्या करें,
है नियति ऐसी अगर, वो क्या करें।
१०.
साथ संग ऐसा किया, वो क्या करें,
सेंध तो लगनी ही है, वो क्या करें।
११.
दिन में दिन दिखता नहीं, वो क्या करें,
 इतनी अधीरी आस है, वो क्या करें।
१२.
बस खैर उनकी मांगते, वो क्या करें,
अल्लाह तो वो हैं नहीं, वो क्या करें।
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मौसम है

Rakesh Tewari
मौसम है
मौसम है रंग उड़ाने का,
मस्ती का, मस्तानों का,
बहकी, महकी बातों का, 
मादक महुए वालों का।
अफसानों का, अरमानों का,
मनचाही पेंग बढ़ाने का,
ऐय्यारी का, लफ्फाजी का,
मौसम है रंग उड़ाने का।
चंडूखाने की ख़बरों का,
इठलाने का, इतराने का,
कनफुसकी में जीने का,
मौसम है रंग उड़ाने का।
अपने ही मन की गाने का,
बेमसरफ उड़ जाने का,
मन आया सो बकने का,
मौसम है रंग उड़ाने का।
आँखों पर झाँपा कसने का,
अटक भटक कर, खोने का,
भरमाने का, खिझियाने का,
मौसम है रंग उड़ाने का।
बेबाती गाल बजाने का,
 कौओं से कान कटाने का,
 गरियाने, धूर उड़ाने का,
 मौसम है रंग उड़ाने का।
चरागाह में हलचल का,
रेवड़ ले कर चलने का,
भेड़ों पर घात लगाने का,
 मौसम है रंग उड़ाने का।
रंगों में छुप जाने का,
गैरों को गले लगाने का,
अपनों को और समझने का,
मौसम है रंग उड़ाने का।
ज़ज़्बातों में बहने का,
चालों का उड़न तरानों का,
चोला नया रंगाने का,
 मौसम है रंग उड़ाने का।
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Thursday, September 15, 2016

Suabarei surprise

Suabarei surprise: The ASI discovers a separate Neolithic phase for the first time in Odisha’s prehistory, followed by a clear-cut Chalcolithic horizon, in its excavations at Suabarei in Puri district. The two levels are separated by a gap of one metre that indicates 600 years of unexplained non-occupation. By T.S. SUBRAMANIAN

Monday, July 11, 2016

जाने क्या ?

जाने क्या ?

बहुत पुराने मिलने वाले, 
जाने क्या हो गया उन्हें ?


जाने माने ऊंचे ऊंचे
मिल जाते भूले भटके, 
कोरा में भर कर मिलते.


फोन कभी जो कर लेते, 
पलट काल करते रहते 
मीठी मीठी बातें करते।


सोचा कितने दिन बीत गए,
मुख दर्शन को तरस गए,
क्यूँ ना मिल बैठा जाए।


बोले कहिए कब कहाँ आएं, 
दिन ठौर ठिकाना नियत किये,
फिर, जाने क्यों वो ना आए।


एस एम एस और काल किये,
फिर भी पलट नहीं आए 
जोहते रहे वो ना आए।


पता नहीं क्या जुर्म किए, 
जाने-अनजाने कहाँ किए, 
बिना बताए सजा दिए।


कह देते क्यों खफा हुए,
चुप्पी क्यों ऐसी साध लिए, 
भीतर कैसी कुढ़न लिए।


अनचीते क्यूँ वार किए, 
अनहक ही अवसान किए, 
अपने कपाट क्यों बन्द किए।


भूले से क्या सोच लिए,
दुनिया में सरनाम हुए,
बड़े हुए जग जीत लिए।


मन में कुछ ऐसा भाव लिए 
मिलें कहीं कुछ मांग न लें, 
हाथों में भिक्षा-पात्र लिए।

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Monday, May 23, 2016

सब सपना है


सब सपना है

हमने समझा वह पगला है, 
सड़कों पर बहका करता है।


बस एक तराना जपता है, 
सब सपना है सब सपना है।


जो लगता अपना अपना है 
वो भी केवल एक सपना है।


जो बीत गया वो सपना है 
जो होता है बस सपना है।


जो आना है वो सपना है 
आता जाता बस सपना है।


ये भी कर लें वो भी पा लें 
ये सपना, वो भी सपना है।


वो हार गए, वो जीत गए 
वो भी सपना ही सपना है।


वो बड़ा हुआ, वो छोटा है,
यह भी मानो बस सपना है।


वो जीते जी भी सपना है,
जो चला गया वो सपना है।


जब आँख खुले पट उठता है,
जब बंद हुई पट गिरता है।


वह बात पते की कहता है, 
अब मान भी लो सब सपना है।

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