Sunday, July 12, 2026

अंग दर अंग सुन्न हो रहा 

कुहासा घना दिखना धुँधला रहा

सांझ तो सांझ रात घिरने लगी 

चलो अब समेट लें  पतंग अपनी . 


08 June 2025 R.T.

Saturday, July 11, 2026

 चाहत से यथार्थ कहाँ बदलता है !!

Friday, July 3, 2026

जो आवै एहि राह में, चाहे कोऊ होय,
चलै एक सी चाल ते, राहत मिलै न कोय !
कढ़िलत कढ़िलत पल कटैं, बावर सौं बन जांय !!

Sunday, June 28, 2026

 दो पल,

नेह-मेल भर के,
सुध-बुध खोए,
उब्ब-डुब्ब,
दिन रात गए,
बेसुध निद्रित, 
क्या कही-सुनी !!
तब बहुरि सकी,
क्या कहा-सुना!!
क्या निहित रहा !!
गुन-गुनते, मरम
भार-भर आँखों,
थोड़ा पाया, पर 
थाह कहाँ पाया !!
फिर, चाह रहा, 
फिर मिल पाया, 
तो  पूछेंगे, 
जो समय रहा,
जो, चेत सका !!, 

Friday, June 26, 2026

 दिल करता है,

कुछ लम्हों को 
"फ्रीज़" कर दिया जाए।
एक वे जो फिर 
कभी न आएं ।
दूजे वे जो हमेशा,
हमेशा वैसे ही
बने रहें।

अब इतनी उम्र ही कहाँ रही !!

कभी यह कह पाने की,
कि हमने कभी उन्हें,
नजदीक से, नेह से,
देखा-सुना, साथ जिया है ।
अपने साथी अग्रज ही नहीं
अल्पवयी भी बड़े, समझदार,
व्यक्तित्व के धनी प्रेरक,
सुधी हो सकते हैं।

Thursday, June 25, 2026

 कितना ही उलट-पलट 
छटक-पटक कर,
सोचा-परखा-समझा, 
अपने परिप्रेक्ष्य में,  
उन्हें पाक-साफ 
निश्छल पाया,  
उन पर नेह, 
अपने आप पर रोस आया।