Sunday, September 20, 2026

'एक बहती धार'

पहाड़ से उतरते, 
थक कर बैठने से पहले, 
मुग्ध मन, ठिठक गया।  

एक अल्हड़ धारा, ढलान पर
इठलाती, मुस्कुराती, 
देखते ही, सम्मोहित हो गया।  

साथ साथ, चलने लगा,
बढ़ती धारा का वेग 
स्थिर होता गया। 

भूमि से रिसते आते, 
जल-स्राव से पूरित 
नव-सौष्ठव भरता गया।  

मंथर गति गहराती, 
रूखड़ रसमय करती, 
नव-रूप धर लिया। 

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Sunday, August 30, 2026

 होनी न फेर पाएगा 


हमने सोचा, ये दौर आकर के गुज़र जाएगा, 
ये नहीं सोचा कि उसी ठौर ठहर जाएगा। 

रेला है हवाओं का, उठकर के चला जाएगा, 
बहता रहा ऐसा कि अब तो कभी न जाएगा।  

हमने सोचा कि बाढ़ के मानिन्द उतर जाएगा,
वो बढ़ा, बढ़ता गया, अब साथ ही ले जाएगा।    

ललाट पर लेखा जो जैसा सामने वो आएगा,  
लाख कर लीजे जतन, होनी न फेर पाएगा।   

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Saturday, August 29, 2026

 'बेमशरफ़ की बातें'  

'मुझको अपने हाल का हवाल दीजिए !'# 
कभी-कभी तो मेरा भी ख़याल कीजिए !

माना दुनिया भर में जंजाल बहुत है,
कभी-कभी उनसे कुछ निजात लीजिए !! 

काम के बवालों का दबाव बहुत है, 
उनको भी किनारे कुछ सरकाय दीजिए।!   

घिरते सवालों का सिरदर्द बहुत है, 
थोड़ा सा बतियाने का भी याद रखिए !! 

अपनी लय में आपका अंदाज अपना है,
औरों का भी थोड़ा-मोड़ा ध्यान रखिए !!

मनमानी राहों पर चलना तो सही है,
भूली भटकी राहों का भी हाल लीजिए  !!

मस्त-मगन रहिए ये अपने मन की चाहत है,
अरझी-उलझी अलकें तो  संवार लीजिए !!

सुख-दुःख की खबरें देना तो केवल दस्तूरी है, 
कभी कभी बेमशरफ़ वाली बातें कीजिए !!

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# धुन मंज़र भोपाली से नक़ल कर ली है 

Sunday, August 16, 2026

 पौध सुगढ़ सुंदर हरियाय, 
बरस बरस  बाढ़ै चिकनाय। 

शाख-प्रशाख पात दर पात, 
रिमझिम रिमझिम बरसै बरसात। 

लहरा मारै सावनी बयार, 
झूल झलर झूलै बगियान। 

रूप सबै मोहन बरवार, 
रीझै तन-मन बूड़ै भवताल।। 

Thursday, August 13, 2026

 मोह घन घिरते, घेरते, आवरण घनेरे, 

देख कर भी, दिख रहा, दिखने न देते। 

Friday, July 31, 2026

 पुनरावर्तित अवहेलना-अनदेखी, 'दुर-दुर' संकेतक। 

आपकी अपेक्षा एकतरफा हो सकती है।

Wednesday, July 29, 2026

 अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !

क्या बीती है मुझ पर, तुम्हें क्या पता !!

होठों की तड़पन, तो तुमने थी देखी,
मगर क्यों हुआ ऐसा, तुमने न सोची !! 

कैसी विकलता वो पीड़ा थी कैसी !
थोड़ी भी उसकी तू तह में न पैठी !!

कहा तो कहा, क्या बीती है मुझ पर 
तुम्हें क्या पता है, तुम्हे क्या पता है !!

तुमने कहा था, रास्ते और भी हैं, 
जो चाहे वो कर लो, ये मैंने कहा है।  

न जाने क्या सोचा, मायने क्या लगाए !
फिर न पलटे बताए असल बात क्या है 

अपनी राहें जुदा हैं, ये कब कहा !!
क्या बीती है मुझ पर, तुम्हे क्या पता।

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