Tuesday, June 16, 2026

 मुंदती खुलती आँखों ने अमावसी पट पर पढ़ लिया !

वो हर्फ़ जो पूरे चाँद की रौशनी में नहीं सूझ पाया। 

Monday, June 15, 2026

 आपकी सही जगह समझाने 

वाले वाकये, 

प्रायः मोहवश समझ नहीं आते। 

 सरे आम कह दो, तो सह भी जाए कोई,  

बिना बताए सताना तो कोई बात नहीं। 

Wednesday, January 21, 2026

 चलते हैं, 

चलना ही है ।


न नेह जगाओ,
न मोह लगाओ,
न साथ गहो !


अब बहुत हुआ, 
अब बहुत हुआ !


अब चलना है, 
चलना ही है।


16.01.26

Wednesday, January 7, 2026

 रस्मी तौर पर मिलना कोई जरूरी तो नहीं ! 

रोज़ ही तो बेदखली से मिलते हैं ख्यालों में !!

Friday, December 19, 2025

 सुबह सुबह सोचते रहे, 

जल्दी जल्दी लिखेंगे,  
जो कुछ अधूरा 
पूरा करेंगे। 
वक्त बहुत कम है
बहुत कुछ पूरा करना है ।

 फिर हुए उनींदे उनींदे,
अलस अशक्त 
पलकें बन्द 
इतनी जल्दी ही 
गहरी नींद में पलट गईं, 
बहुत बहुत अधूरा है अभी।

Saturday, November 29, 2025

ये एहसास भी कितना तसल्ली-बख्श होता है,

हमारे शहर से बहकर तेरा बेड़ा गुज़रता है।  

27 Nov 2025