19 July 2014
कल शाम बड़े काम की बात कह गए एक बनारसी।
उनके जिगरी दोस्त (जो अब नहीं रहे) ज़ोर दे के कहते रहे -
"बाबू !
भगवान से कब्बौ न्याय ना मँगिहा,
ना जाने जाने-अनजाने कौन कौन पाप कइले होइहा।
उप्पर वाले से जब माँगा तो रहम मँगिहा, बस। और, कुच्छौ नाहीं !"
एतना गहरा उतरा रहा, रहा ना रहा, ई बतिया त जुग-जुग जियत रही, गुरू !!