पुनि बैतलवा डाल पे बैठे ---।
एक ज़माना हमने देखा,
अपनी आँखों हमने देखा
फिर फिर देखा,
देख रहे हैं, देखेंगे।
हिंदी लेकर आएंगे,
अंग्रेज़ी दूर भगाएंगे।
दोनों हाथ उठा कर बोल,
गरीबी दूर हटाएंगे।
समाजवाद ले आएँगे,
सम्पूर्ण क्रान्ति अब लाएंगे।
सिंहासन खाली करो
कि अब तो जनता वाले बैठेंगे।
मंडल-मंडल गाएंगे,
समता लेकर आएँगे।
बाबा-बाबा नाम जपेंगे,
भेदभाव सब दूर करेंगे।
तिलक-कमण्डल
लेकर निकले,
भ्रष्टाचार मिटाएंगे,
रामराज ले आएंगे।
वही कहानी सुनते लखते,
माथा अपना धुनते धुनते,
चंदामामा में जो पढ़ते,
पुनि बैतलवा डाल पे बैठे ---।
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