Sunday, July 19, 2026

 19 July 2014

कल शाम बड़े काम की बात कह गए एक बनारसी।
उनके जिगरी दोस्त (जो अब नहीं रहे) ज़ोर दे के कहते रहे -
"बाबू !
भगवान से कब्बौ न्याय ना मँगिहा,
ना जाने जाने-अनजाने कौन कौन पाप कइले होइहा।
उप्पर वाले से जब माँगा तो रहम मँगिहा, बस। और, कुच्छौ नाहीं !"
एतना गहरा उतरा रहा, रहा ना रहा, ई बतिया त जुग-जुग जियत रही, गुरू !!

 सूख चली धरती पर, झीसी भर बरखा !!

Monday, July 13, 2026

 खलिहर लोग कामकाजुओं से जितना दूर रह सकें उतना अच्छा ! 

Sunday, July 12, 2026

अंग दर अंग सुन्न हो रहा 

कुहासा घना दिखना धुँधला रहा

सांझ तो सांझ रात घिरने लगी 

चलो अब समेट लें  पतंग अपनी . 


08 June 2025 R.T.

Saturday, July 11, 2026

 चाहत से यथार्थ कहाँ बदलता है !!

Friday, July 3, 2026

जो आवै एहि राह में, चाहे कोऊ होय,
चलै एक सी चाल ते, राहत मिलै न कोय !
कढ़िलत कढ़िलत पल कटैं, बावर सौं बन जांय !!

Sunday, June 28, 2026

 दो पल,

नेह-मेल भर के,
सुध-बुध खोए,
उब्ब-डुब्ब,
दिन रात गए,
बेसुध निद्रित, 
क्या कही-सुनी !!
तब बहुरि सकी,
क्या कहा-सुना!!
क्या निहित रहा !!
गुन-गुनते, मरम
भार-भर आँखों,
थोड़ा पाया, पर 
थाह कहाँ पाया !!
फिर, चाह रहा, 
फिर मिल पाया, 
तो  पूछेंगे, 
जो समय रहा,
जो, चेत सका !!, 

Friday, June 26, 2026

 दिल करता है,

कुछ लम्हों को 
"फ्रीज़" कर दिया जाए।
एक वे जो फिर 
कभी न आएं ।
दूजे वे जो हमेशा,
हमेशा वैसे ही
बने रहें।

अब इतनी उम्र ही कहाँ रही !!

कभी यह कह पाने की,
कि हमने कभी उन्हें,
नजदीक से, नेह से,
देखा-सुना, साथ जिया है ।
अपने साथी अग्रज ही नहीं
अल्पवयी भी बड़े, समझदार,
व्यक्तित्व के धनी प्रेरक,
सुधी हो सकते हैं।

Thursday, June 25, 2026

 कितना ही उलट-पलट 
छटक-पटक कर,
सोचा-परखा-समझा, 
अपने परिप्रेक्ष्य में,  
उन्हें पाक-साफ 
निश्छल पाया,  
उन पर नेह, 
अपने आप पर रोस आया।  

Monday, June 22, 2026

मन लागै तंह नेह लगाओ, 
पलट मिलै सो डूब रसाओ, 

ना पलटै तव मान रखाओ, 
पर, आस न राखौ  सोय !!

Friday, June 19, 2026

'ढंग से समझिए !!'

किसी से मिलने की चाह मत रखिए, 
किसी से  मन की बात ना कहिए! 

सबके अपने ही लस्तगे हैं ज़माने में, 
किसी के दर पे अब कहाँ थमिए !

अब कौन चलेगा रास्ते पर तेरे, 
किसके मशरफ के अब कहाँ कहिए ! 

सबकी अपनी जुदा जुदा हैं तरज़ीहें, 
ख्वाहिशें नज़रे इनायत की मत रखिए !!   

बेहतर है तन्हाई में सिमट कर रहिए,
बेवजह किसी को तंग ना करिए !! 

हवाओं के रुख की भी खबर रखिए, 
अपनी सीमाओं को ढंग से समझिए !! 

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Tuesday, June 16, 2026

 मुंदती खुलती आँखों ने अमावसी पट पर पढ़ लिया !

वो हर्फ़ जो पूरे चाँद की रौशनी में नहीं सूझ पाया। 

Monday, June 15, 2026

 आपकी सही जगह समझाने 

वाले वाकये, 

प्रायः मोहवश समझ नहीं आते। 

 सरे आम कह दो, तो सह भी जाए कोई,  

बिना बताए सताना तो कोई बात नहीं। 

Wednesday, January 21, 2026

 चलते हैं, 

चलना ही है ।


न नेह जगाओ,
न मोह लगाओ,
न साथ गहो !


अब बहुत हुआ, 
अब बहुत हुआ !


अब चलना है, 
चलना ही है।


16.01.26

Wednesday, January 7, 2026

 रस्मी तौर पर मिलना कोई जरूरी तो नहीं ! 

रोज़ ही तो बेदखली से मिलते हैं ख्यालों में !!