Sunday, June 28, 2026

 दो पल,

नेह-मेल भर के,
सुध-बुध खोए,
उब्ब-डुब्ब,
दिन रात गए,
बेसुध निद्रित, 
क्या कही-सुनी !!
तब बहुरि सकी,
क्या कहा-सुना!!
क्या निहित रहा !!
गुन-गुनते, मरम
भार-भर आँखों,
थोड़ा पाया, पर 
थाह कहाँ पाया !!
फिर, चाह रहा, 
फिर मिल पाया, 
तो  पूछेंगे, 
जो समय रहा,
जो, चेत सका !!, 

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